bade baba bamora

गोत्र



ॐ जय जगदीश हरे

खातीसमाज के लोगों की वंशानुगत पहचान के कारक (आस्पद, गौत्र, कुलदेवी तथा मूलस्थान)

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और वह सबके बीच रहकर ही अपने जीवन के सुख-दुःख, लाभ-हानि और जीवन-मरण के क्षणों में तालमेल बैठाता रहा है। वह सदियों से चली आ रही परंपराओं का भी निर्वहन करता रहा है। कोई इन परंपराओं को श्रद्धापूर्वक मानते आ रहे हैं, तो कोई-कोई सामाजिक मान्यताओं के कारण विभिन्न कर्मकांडों को पूरा करते हैं। कुल मिलाकर सदियों पुरानी परंपराएं आज भी जस की तस समाज में प्रचलित है। विशेषकर खास मौकों पर इन प्राचीन और सदियों से चली आ रही रीतियों को अपनाने का सामाजिक दस्तूर ही है। समय, काल और परिस्थिति के अनुसार इन परंपराओं

और रीतियों में कभी-कभी मामूली अंतर देखने में आता है। लेकिन इनका मूल स्वरूप वही होता है। ठीक वैसे ही जैसे कोई वाक्य अपभ्रंश होकर अपना नया रूप धारण कर लेता है, उसी तरह परंपराएं भी प्रकारांतर से मूल रूप में वही होती है। यहां तक कि हर विशेष समय में इन रीति-रिवाजों की व्याख्या भी की जाती रही है। सामाजिक तौर पर गांवों में एक मुखिया बना दिया जाता है और उत्सव अथवा किसी भी रस्म को निभाने में उस व्यक्ति अथवा समाज के पुरोहित के अनुसार रस्मों को निभाया जाता है। निश्चित रूप से हमारे द्वारा रस्में निभा ली जाती है, लेकिन हम कभी भी उन रस्मों की जड़ों तक नहीं जाते। इन रीति-रिवाजों और परंपराओं का कोई अर्थ तो होता ही है। इनकी शुरुआत में कोई अर्थ निहित होंगे। कई लोग होंगे जिन्हें इसकी जिज्ञासा भी बनी रहती होगी कि आखिर इन परंपराओं के पीछे क्या राज है, अथवा ऐसा किए जाने का कोई तो कारण होगा? इन तमाम प्रश्नों की तह में जाने का प्रयास किया जाता है, लेकिन जानकारी के अभाव में व्यक्ति की जिज्ञासा शांत नहीं होती और वह परंपरानुसार उन रीति-रिवाजों के बारे में और अपने स्वयं के कुल-गौत्र-देवता के बारे में जाने बिना ही

सबकुछ स्वीकार कर उन्हें निभा भी लेता है। यदि इस विषय पर एक खोजपरक विश्लेषण समाज व जाति के लोगों को उपलब्ध करा दिया जाए, तो यह एक बहुत ही सुविधाजनक पहल हो सकती है। कभी मन में ऐसा करने की इच्छा थी, लेकिन आज गांव-दर-गांव लोगों के आस्पद, गौत्र, कुलदेवी व मूलस्थान के बारे में यहां पुख्ता जानकारी एकत्र कर प्रकाशित की जा रही है। उन्हें जानने से प्रतीत होता है कि खाती समाज के लोगों की यात्रा एक बड़ी दूरी तय करके आज तक पहुंचती है। कहने को तो इस जाति के लोगों का आज अपना गांव है, निवास है और काम-धंधा है, लेकिन एक यायावर की तरह

वे लंबी यात्रा तय करके इस मुकाम पर पहुंचे हैं। उनके पूर्वज एक लंबे संघर्ष से गुजरकर इस गांव और स्थान तक पहुंचे हैं। कभी किस कारण से तो कभी किस कारण से उन्हें यात्राएं करना पड़ी है। यात्राओं का यह इतिहास यहां आस्पदों और मूल स्थान के रूप में स्पष्ट किया गया है। खाती वंशजों की एक तरह से यह ऐसी डिक्शनरी है, जिसमें उनके वंशानुगत संस्कारों  और वर्तमान गौत्र, आस्पद अथवा गांव की कहानी खुलकर सामने आ रही है। इसके लिए सालों तक खोज की गई है। विभिन्न ग्रंथों और इतिहास के पन्नों को पलटा गया है। यह एक अनूठा प्रयास है। यदि इससे आप लोगों को कोई सुविधा हो सके, तो निश्चित ही हमारे प्रयास और परिश्रम को हम सार्थक समझेंगे। इन खोजों के लिए सालों तक गांवों, किताबों और अनुभषों की यात्राएं की गई हैं। इन तमाम यात्राओं के निष्कर्ष रूप में 25 सालों में एकत्र की गई इन खोजों का संग्रह यहां संकलित किया गया है। आशा है आपको अपने आस्पद, अपने गौत्र, अपने कुलदेवी-देवता और मूल स्थान के बारे में पुख्ता जानकारी पाकर प्रसन्नता होगी और यही हमारे प्रयासों की सार्थकता होगी।

 

आस्पद, गौत्र, कुलदेवी एवं मूल स्थान की सूची

क्र.

आस्पद

गौत्र

कुलदेवी

मूल स्थान

1

अमलावद्या

आलासरी

आमका

अमलावदा

2.

 

अजनावद्या

अजनास

अयरमा

शंभुदेवी

अजनावद

3.

अजवास्या

आगाज

मालसानी

अजवास

4.

आलेरिया

 

धनारिया आसोद्या

धानेस

अंबिका आलमाल

अंबिका

अलेरी

अलेरी

अलेरी

5.

असवारिया

महारख

महासरी

आसावरा

6.

आकोद्या

अजनासी

आकाशी

अकोद्या

7.

बरंडवा

बालास

बाड़मी

बाराड़वा

8.

बरनास्या

 

वरनासी

बरनास्या

नीमाज

लीमाज

बरनासा

 

9.

बाबड़ोद्या

बलाहस

बेहरावरी

वावडोद्या

10.

बीजलपुरिया

बछलास

बिजासन

बीजलपुर

11.

विदरोढ्या

बिछलास

आकाश

बिजासन

बिदरोड़

12.

बीरोती

सवास

थलसीवा

बीरोती

13.

बिजारया

 

 

बिजार

14.

बीजाल्या

बींजाल्या 

 

 

 

15.

बिजावरया

 

माघदेवी

बिजावर

16.

बिलोद्या

बिलास

घारणीदेवी

बिला

17.

बामलोद्या

बछलस

 

वमलोद

18.

बिलाबल्या

बारस

वारादेवी

बिलावला

19.

भमोरया

भाराम

सुचिदेवी

भामोरा

20.

भेंसोद्या

भारवाज

भवानी

भेंसोदा

21.

भेंसान्या

बछलछ

आशापुरी

भेसान्या

22.

भवरास्या

भारजा

भवानी

बिजावर

23.

भदेडिया

भेदड़ना

आरबभान

 

जामनादेवी

 

भदेड़ी

 

24.

चौरास्या

भारद्वाज

भैरवादेवी

चौरास्या

25.

चितावद्या

 

 

 

26.

चितावल्या

 

 

 

27.

चन्दवास्या

 

चनस

गुआतभारजा

गुआलभारदज

चनसदेवी

आमज

 

चंदवासा

 

28.

छवड़ास्या

 

चमरू

छिवड़ास

29.

देहथल्या

भारेजा

कालश ऋषि

आमज

मालिनी

 

देहथल्या

देहथल्या

30.

देवदल्या

देवल्या

रेणुकादेवी

देवदल्या

31.

डगग्या, डगरया

 

 

 

32.

दिलोद्रया

दालमी

सावती

दिलोदरी

33.

डिगरोद्या

साढ़व

कमला

डिगरोदी

34.

ठिकरोद्या

 

गलाबा

साढ़लछ

जसदेवी

 

ठिकरोदी

 

35.

ढगा

अमनेस

तेरा

ढगा

36.

ठुकरास्या

बाहनासी

कंकेश्वरी

ठुकरानी

37.

डकनावद्या

वहलस

बिसामरा

ठकनावद

38.

इटावद्या

कोटग ऋषि

गजलस

बीरज

कोटलक्ष्मी

धीरज

इटावद

39.

गुनघोरिया

गौतम, भूते

गागासारी

गुनघोरिया

40.

गुवाल्या

गाहरवीश

धानेव, धन्व

गोगल

गुनधाड़ी

गुवाला

ग्वाल्या

41.

गुटावद्या

गार्गलस

गौरी

गुड़ावद

42.

गुनघोड़ना

 

 

 

43.

गंगावत्या

गौतम

गौतमी

गंगावता

44.

 

गौतम

गौतमा

गागा, गागोत्या

45.

गिरोढ्या

 

मंत्रमान

मनमान

आकाश

आकाश

गिरत्या

गिरोता

46.

घुरावड्या

गौतम

घुराव

घुरावड़ा

47

इछावारिया

 

 

 

48.

जामगोद्या

दलावा

गोवदान

जामगोद

49.

जामल्या

जामऋषि

हरसिद्धि

 

50.

जलोद्या

जामऋषि

जलधारणी

जलोदिया

51.

जागल्या

 

 

 

52.

जावरिया

बरवारस

बावनबी

जावरा

53.

जवास्या

 

 

जवास्या

54.

जागोढ्या

जालासी

जाहलस

जयश्री

जाहसरी

जगोड़ी

जगोट्या

55.

झललावा, जलावा

जाजानीसी

जजनस

जालामलनी

जालामल

जलावा

जलावा

56.

कनबाड़

कालेयान

कालामानो

कनबाडी

57.

कनास्या

कवि साख

सापुईदेवी

कनास्या

58.

करनावद्या

काबातस

कोतमा

करनावद

59.

कारंजया

कावसीख

समाहारा

करंजा

60.

कलमोद्या

कलारवान

करमकी

कलमोदिया

61.

कैलोद्या

 

मने

उकाम

कंकाली

कैलोद

 

62.

कनारिया

 

 

 

63.

 

कामोद्या

कामोडिया

भगातव

 

भैरवी

 

कमोड़ी

 

64

कासरन्या

कासरन्या

कश्यप

काशिव

कालामानो

 

कासुरन्या

कासुरनो

65.

कुलखण्या

कारनस

करणक

कुलखद्या

66.

कामोदया

 

 

 

67.

केल्या

पदमसी

पदमसीन

पदमावती

 

केल्या

68.

कसोद्या

कालऋषि

कलामलनी

कसोदनी

69.

केसोदन्या

 

 

 

70.

खीरबड़ोदिया

 

 

 

71.

खिवाल्या

 

 

 

72.

खजुरया

विजयपालसी

खीमज

खजरी

73.

खिवास्या

सारन,

सरनेस

खेइदेवऋषि 

खरऋषि 

श्रीमंगला

 

 

खवजदेवी

खिवास्या

74.

खिरेल्या

शंखग शंख

संभव

तंवारदेवी

पीपारदेवी

खराहल्या

खिरहल्या

75.

खाचरोदाय

गुड़गुड़स

गुरट्स

खीमज

खमाज

खाचरोद

76.

मठोड़या

घाघलसी

पुरानी

कुसानी

मठोड़या

मठाड़या

77.

मंडलावदया

महर्षि 

माहेश्वरी 

मंडलावद

78.

महारावदया.

इमामा

इमाम्या

महामाया

महामायी

मेराबदी

महारावदया

79.

मड़ोदया

 

 

 

80

नागढोंदया

नानसी

नंदादेवी

नागठोद्या

81.

नादोद्या 

बछलस

बरनदेवी

 

नानोदपुर

तोरनोदपुर

82.

पीपल्या

 

 

 

83.

पचौरया

अतीमा

अतीम

अतिख अतिरण

पचोर

84.

पलसावद्या

पारेसुर

पारसिक

पारसुन

पीपलसेन

पारसी

पीपल्यापानी

पालसावा

पालरवादा

पलसावद्या

85.

रानावद्या

 

 

 

86.

रोहड़ावद्या

रिराव

रानेका

रोहड़ावाद

87.

रंडावद्या

 

रानेका

रंडावद

88.

रिनोज्या

रिराव

राख रेणुका

रानेका

राख रेणुका

नानजी

रिनोजी

89.

रलियावना

रातानधज

राती

रलियावना

90.

रुदाहेड़या

 

 

 

91.

रुघावड्या

रकीबे

रनेका

रुदवेडी

92.

सोठोल्या

सारिवा

सामाबदेवी 

सुठालिया

93.

सिरसोदिया

सावलक

सिरेमालजी

सिरसोदिया

94.

सिवदास्या

सावरन

शिवलिंगी

 

95.

सिवास्या

सिवासी

 

सिवासीगाँव

96.

सुमटेहडया

 

 

 

97.

सुमढया

 

 

सुल्तानपुर

98.

सालोन्या, अलोन्या 

 

 

अलुन्या, सालोन्या

99.

स्वाग्या

 

 

 

100.

सनबान्या

सावर्ण , सावरनी

 

सनवानी

101.

सगबाल्या

सगबाल्या

सगबाल्या

सगबाल्या

सगबाल्या

सगबाल्या

स्वर्गाषि 

पदमसाम

गहलीस

पादमानी

सावरलिकरी 

लीलावती

 

मंगलदेवी

लालावती

 

ऋषि वदविदस्ट

सगवाली

संवरसंस 

सगवाली

सगवाली

सगवाली

सगवाली

102.

तिलावदिया

अतीम

आकीनदेवी

तिलावद

103.

ताजपुरिया

वीखीमंत्रस

लाखीमदेवी

ताजपुरा

104.

थेगल्या

अगवा गोरवी

उमादेवी

थेगल्या

105.

उपलावदिया

गजलस

वाहरवाट

कोटलक्ष्मी

धीरजदेवी

उपलावद

 

गोविन्द सिंह बलभद्र (लेखक खाती वंश) के अनुसार